विश्व तंबाकू निषेध दिवस

तंबाकू का इतिहास

तंबाकू विश्व भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले नशीला पदार्थ है जो कि निकोटीन नामक वृक्ष की पत्तियों से प्राप्त किया जाता है जिसमें निकोटिन नामक हानिकारक तत्व पाया जाता है।
तम्बाकू की सबसे पहली उत्पत्ति 600 ईसवी पूर्व अमेरिका क्षेत्रों में हुई थी, जो बाद में इसका उपयोग लगातार बढ़ता ही गया। उसमें इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में सुगंध के लिए किया जाता था समय के साथ इसका उपयोग एक अस्थाई सुख के लिए होने लगा।
400 वर्ष पूर्व पुर्तगालियों द्वारा इसे पहली बार भारत में लाया गया और तभी से तंबाकू का विभिन्न प्रकार से उपयोग भारत में होने लगा।

तंबाकू उपयोग करने के तरीके

विश्व के अधिकांश देशों में तंबाकू का उपयोग सिगरेट के रूप में किया जाता है जबकि भारत की बात करें तो भारत में सिगरेट के अलावा तंबाकू का उपयोग बीड़ी ,हुक्का, गुल, खैनी, गुड़ाखू, गुल, जर्दा, किमाम ,गुटका आदि प्रकार से किया जाता है।

1. स्मोकिंग

यह बेहद आम तरीका है बीड़ी शिकार होकर सिगरेट कई माध्यम से तंबाकू का इस्तेमाल किया जाता है।

2. चबाकर

यह भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करने का प्रचलित तरीका है पहले इस विधि का उपयोग दांत व कान के दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता था,
किंतु समय के साथ यह लोगों की आदत में शुमार हो गया।

3. मुंह में रखकर चूसना

इसमें तंबाकू को होठ और मसूड़ों की बीच में रखकर इसके रस को जूस आ जाता है।

4. सूंघना

इस विधि में तंबाकू की पत्तियों को बिना जलाए सुंधा जाता है।

शरीर पर तंबाकू की क्रिया

जब किसी भी प्रकार से तंबाकू को शरीर में लिया जाता है तब एक सक्रिय पदार्थ निकोटीन का स्राव होता है ,जो शरीर की कोशिकाओं से होकर रासायनिक क्रिया करके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर डोपामिन अवशोषित तथा इंडोफिन का स्राव होता है जो शरीर के तनाव को दूर करता है।

शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव

अधिकांश लोगों का कहना है कि तंबाकू का धुएं के रूप में इस्तेमाल करना ज्यादा नुकसानदायक है पर सच तो यह है कि तंबाकू का किसी भी प्रकार से उपयोग शरीर पर हर प्रकार से घातक ही है तंबाकू का शरीर की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित होने के बाद तंबाकू शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न हानिकारक प्रभाव डालता है।

1.फेफड़ा

सिगरेट के रूप में तंबाकू का इस्तेमाल बहुत हद तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है तंबाकू का धुआं फेफड़ों की कोशिका में जमा होकर फेफ़डा को गैस के आदान-प्रदान के कार्य को बाधित करता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन का हृदय पर इसका प्रभाव पड़ता हैं।
भारत में हर साल 53728 लोग लंग कैंसर से ग्रसित होते हैं।

2. ह्रदय

ऑक्सीजन की कमी से हृदय को ब्लड पहुंचाने वाली नलिकाए में प्रभावित होती है जिससे हृदय को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है इसके प्रभाव से भविष्य में हाइपरटेंशन ,हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

3. आहार नाल

तंबाकू का उपयोग जवाब कर गया मुंह में रखकर मुंह का कैंसर होता है जो कि बहुत ही घातक बीमारी है

WHO की रिपोर्ट के अनुसार 657000 केसेस हर साल रिकॉर्ड होते हैं जिनमें 330000 लोगों की डेथ हरसाल ओरल कैंसर के कारण हो जाती है। 1920 के दशक में स्वास्थ्य समस्या का संबंध धूम्रपान से बताया गया जिसके बाद धूम्रपान विरोधी अभियान की तलाश हुई किंतु द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ये अभियान थम सा गया। 1965 में पुन: अभियान की तलाश हुई, इसके बाद विकसित देश में तंबाकू की खपत में गिरावट हुई किंतु विकासशील देशों में इसकी खपत लगातार बढ़ने लगी। 1980 के दशक में इस बात का प्रमाण प्राप्त हुआ कि तंबाकू के सेवन से स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है । तत्पश्चात WHO ने तंबाकू के कारण होने वाले दुष्प्रभाव व मौत को संज्ञान में लेते हुए 31 मई 1987 को वर्ल्ड नो टोबैको डे घोषित किया।

WHO द्वारा किए गए प्रयास

1. 1987 में WHO के स्वास्थ्य सभा ने एक संकल्प पारित किया जिसमें 7 अप्रैल 1988 को एक “विश्व धूम्रपान न करने वाला” कहां गया जिसका उद्देश्य विश्व में तंबाकू उपयोग करने वालो से 24 घंटे तक तंबाकू का प्रयोग रोकने का आग्रह था। यह एक ऐसा प्रयास था जो तंबाकू छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को प्रेरित कर रही थी।

2. 1998 में WHO ने TFI (तंबाकू मुक्त पहल) जिसकी स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना था तथा तंबाकू के वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दे पर ध्यान देने का प्रयास करना था।

3. 2008 में 31 मई की पूर्व संध्या पर WHO ने सभी तंबाकू विज्ञापन प्रचार प्रसार पर पूरे विश्व में प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया इस दिन का विषय था तंबाकू मुक्त युवा।

4. 2015 मैं डब्ल्यूएचओ ने तंबाकू से जुड़े स्वास्थ्य पर प्रकाश डाला तथा तंबाकू उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए नीति बनाई।

5. 2017 में तंबाकू निवेश दिवस का विषय था “विकास के लिए खतरा”

6. 2018 में तंबाकू निषेध दिवस का थीम था “तंबाकू तोड़ता दिल स्वास्थ्य चुने तंबाकू नहीं।”

7. 2019 में तंबाकू निषेध दिवस का थीम “तंबाकू और फेफड़ों का स्वास्थ्य।

8. 2020 में तंबाकू निषेध दिवस का थीम “फेफड़ों पर तंबाकू का खतरा।”

9. 2021 में तंबाकू निषेध दिवस का थीम छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध।

तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम

27 फरवरी 2005 को डब्ल्यूएचओ द्वारा तंबाकू शारीरिक दुष्प्रभाव को कम करने के लिए कुछ एक्ट पारित किए हैं।

धूम्रपान मुक्त क्षेत्र

इसके तहत सार्वजनिक स्थान, शैक्षणिक संस्था, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, हॉस्पिटल, शासकीय स्थानों पर धूम्रपान करना वर्जित है नियम कानून का उल्लंघन करने पर इसके लिए आर्थिक दंड का भुगतान है।

तंबाकू के प्रचार प्रसार पर रोक

तंबाकू के उपयोग का किसी भी माध्यम द्वारा प्रचार प्रसार करना वर्जित हैं। चेतावनी इसके तहत उत्पादन करता को आदेशित किया जाता है कि तंबाकू के पैकेट पर तंबाकू से होने वाले दुष्परिणामों को चिन्हित करें।

 

 

Frequently Asked Question

तंबाकू क्या है और यह हानिकारक क्यों है?

तंबाकू विश्व भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले नशीला पदार्थ है जो कि निकोटीन नामक वृक्ष की पत्तियों से प्राप्त किया जाता है जिसमें निकोटिन नामक हानिकारक तत्व पाया जाता है।

तंबाकू के हानिकारक प्रभाव क्या हैं?

अधिकांश लोगों का कहना है कि तंबाकू का धुएं के रूप में इस्तेमाल करना ज्यादा नुकसानदायक है पर सच तो यह है कि तंबाकू का किसी भी प्रकार से उपयोग शरीर पर हर प्रकार से घातक ही है तंबाकू का शरीर की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित होने के बाद तंबाकू शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न हानिकारक प्रभाव डालता है।

तंबाकू खाने का तरीका क्या है

विश्व के अधिकांश देशों में तंबाकू का उपयोग सिगरेट के रूप में किया जाता है जबकि भारत की बात करें तो भारत में सिगरेट के अलावा तंबाकू का उपयोग बीड़ी ,हुक्का, गुल, खैनी, गुड़ाखू, गुल, जर्दा, किमाम ,गुटका आदि प्रकार से किया जाता है।

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