Depression ……….Zindgi Ko Khokhla Krta Ek Deemak

 वर्ष 1992,10 अक्टूबर को सबसे पहले मानसिक जागरूकता दिवस के रूप में मनाया गया। इसकी शुरुआत उप महासचिव ने की थी। इसका उद्देश्य हमारे समाज को इस गंभीर बीमारी से अवगत कराना था। जन्हा हम आज भी मानसिक बीमारी के बारे में बात करने में संकोच करते है। क्योंकी आज भी हमारा समाज इसे कलंक की तरह देखता है। तनाव मानसिक बीमारी का सबसे बड़ा कारण है।

अगर हम पूरे विश्व की बात करे तो लगभग 264 मिलियन लोग मानसिक समस्या से जूझ रहे है और भारत में लगभग 16.92 लाख लोग मानसिक तनाव के शिकार है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मानसिक तनाव की संख्या ज्यादा है।पुरुषों की तुलना में महिला १.५ गुना ज्यादा प्रभावित है। विश्व स्तर पर लगभग 800000 लोग मानसिक बीमारियों से अपनी जान गवां बैठते है।

भारत में हर साल 1.5 लाख आत्महत्या के मामले सामने आते है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश,कर्नाटक,तमिलनाडु,पश्चिमबंगाल कोई भी राज्य इस बीमारी से अछूता नहीं है।भारत जैसे विकासील देश में मानसिक बीमारी एक आम समस्या है। शोध के अनुसार 13-15 उम्र के बच्चे मानसिक तनाव से ज्यादा प्रभावित होते है।

क्या हमने कभी सोचा है कि ये अकड़ा दिन प्रतदिन बढ़ क्यों रहा है?

हालात यह की भारत में 3.1 लाख की आबादी में केवल एक या दो मनोचिक्तस्क है, इसमें भी 80% महानगर और बड़े शहरों में स्थित है जिस कारण छोटे शहरों में रहने वाला व्यक्ति इलाज करने में असमर्थ है ।हमारे पास बीमारी तो है पर इलाज करने वालो की संख्या पर्याप्त नहीं है।

बजट के आंकड़ों के अनुसार स्वास्थ बजट का केवल एक या डेढ़ प्रतिशत हि मानसिक बीमारी में खर्च होता है। हमे जरूरत है तो जागरूक होने की और अपने आसपास जागरूकता फैलाने की अपने आसपास जागरूकता फैलाओ और खुलकर बात करो………..

मानसिक तनाव के कारण जो हमे समझना है:

  • शिक्षा और रोजगार का दबाव

  • पारिवारिक परेशानी

  • आधुनिक जीवन शैली

  • किसी प्रकार के नशे की लत लगना

  • प्रेम सम्बन्धी समस्या इत्यादि।

सवाल ये उठता है कि इस समस्या से बाहर कैसे निकला जाए जो हमारे मस्तिष्क पर असर डाल रहा है।

एक नई शुरुआत:

  • अपनी दिनचर्या बदलिए।

  • रोज सुबह उठिए और सुबह की ताजी हवा का मज़ा लीजिए।

  • कम से कम २०-२५ मिनट योगा करिए।

  • ध्यान केंद्रित करिए।

  • खुलकर हसिए,खुलकर गाइए,खुलकर नाचिए,खुलकर रोइए संकोच मत करिए ,याद रखिए आपको कोई नहीं देख रहा है सिवाय आपके।

  • लोगो से मिलिए,कुछ उनकी सुनिए, कुछ अपनी सुनाइए।

  • अपने अंदर की ऊर्जा को पहचानिए और अपने आपको व्यस्त रखिए।

  • अपने आसपास माहौल खुशनुमा बनाइए।

  • नींद कम या ज्यादा आए, लगातार सिर भारी लगे, चिड़चिड़ापन लगे , हताश महसूस हो तो आसपास के चिकित्सक से अपनी समस्या बताइए।

  • जब हमे बुखार ,सर्दी ,आदि जैसी बीमारी होती है तो हम तुरंत डॉक्टर के पास जाते है तो फिर दिमागी बीमारी के लिए जाने में कैसी शर्म। हम क्यों संकोच करते है अपनी ही समस्याओं को बताने में क्युकी हमे डर है कि कन्ही लोग हंसने ना लगे हमारा मजाक ना उड़ाने लगे। याद रखिए “समाज हमसे मिलकर बना है”

    हमे इतना सोचने की जरूरत नहीं है अगर सोचना है तो ये की इस तरह की बीमारी से कैसे बाहर निकला जाए और दूसरों को निकलने में मदद कैसे करे। डर कैसा “ये शरीर हमारा है और इसकी देखभाल करना हमारी जिम्मदारी”

    ये जिंदगी हमारी है जनाब और इसे कैसे जीना है ये हमे निश्चित करना है। कहते है 840000 योनियों के बाद हम मनुष्य रूपी शरीर मिलता है तो इसकी कद्र करिए, हर समस्या का समाधान है जरूरत है तो केवल हमे समझने की और लोगो की सोच बदलने की। इसलिए “स्वस्थ रहिए मस्त रहिए” स्वयं विचार कीजिए कयुकी ये शरीर आपका है और इसे स्वस्थ रखना आपकी जिम्मेदारी है।

 

Frequently Asked Question

डिप्रेशन के क्या लक्षण है?

नींद कम या ज्यादा आए, लगातार सिर भारी लगे, चिड़चिड़ापन लगे , हताश महसूस हो तो आसपास के चिकित्सक से अपनी समस्या बताइए।

डिप्रेशन होने पर क्या करे?

1. अपनी दिनचर्या बदलिए।
2. रोज सुबह उठिए और सुबह की ताजी हवा का मज़ा लीजिए।
3. कम से कम २०-२५ मिनट योगा करिए।
ध्यान केंद्रित करिए।
4. खुलकर हसिए,खुलकर गाइए,खुलकर नाचिए,खुलकर रोइए संकोच मत करिए ,याद रखिए आपको कोई नहीं देख रहा है सिवाय आपके।
5. लोगो से मिलिए,कुछ उनकी सुनिए, कुछ अपनी सुनाइए।
6. अपने अंदर की ऊर्जा को पहचानिए और अपने आपको व्यस्त रखिए।


डिप्रेशन से बाहर निकलने का उपाय

जब हमे बुखार ,सर्दी ,आदि जैसी बीमारी होती है तो हम तुरंत डॉक्टर के पास जाते है तो फिर दिमागी बीमारी के लिए जाने में कैसी शर्म। हम क्यों संकोच करते है अपनी ही समस्याओं को बताने में क्युकी हमे डर है कि कन्ही लोग हंसने ना लगे हमारा मजाक ना उड़ाने लगे। याद रखिए “समाज हमसे मिलकर बना है”

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