Important Things During Pregnancy

एक महिला के लिए वो पल बेहद ही खुशनुमा होता हैं जब वो पहली बार मां बनती हैं। मां के गर्भवती होने से डिलीवरी होने तक के सफर में मां के शारीरिक तथा  मानसिक परिवर्तन में कई बदलाव आते हैं । जैसे:- शारीरिक बदलाव में वजन बढ़ना, जी मचलाना, वॉमिटिंग होना,पैरो में सूजन आना आदि। मानसिक परिवर्तन में महिलाओं का मूड स्विंग होना,अचानक से हंसने लगना, उदास होना,अपने आप में तनाव महसूस करना ,बात बात पर चिड़चिड़ाना,गुस्सा करना आदि । इस बदलाव का कारण हैं  शरीर में हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव ।

 

आइए जानते हैं एक महिला को गर्भावस्था के दौरान   क्या करना चाहिए

  •  योगा – दिन की शुरुआत यदि हम योगा से करते हैं तो हम दिन भर तरोताजा महसूस करते हैं। मां का योगा करना, बच्चे के साथ साथ मां के लिए भी  फायदेमंद साबित होता हैं। प्राणायाम में अनुलोम विलोम , भ्रामरी,ओम का उच्चारण, मेडीटेशन कर सकते हैं। तथा आसन  डॉक्टर के परामर्श के अनुसार करे।
  • म्यूज़िक – इस दौरान हमें स्प्रिचुअल सोंग जैसे भजन, peaceful song सुनने चाहिए ,जो हमारे मन को खुश और आनंद मय प्रदान करे। इसके साथ साथ आप और आपके बच्चे को  भी भावात्मक रूप से जोड़ती हैं।
  • ॉर्निंग वॉक –  एक मां व बच्चे को स्वस्थ वातावरण व सुबह की हल्की धूप मिल सके इसके लिए मॉर्निंग वॉक करना बेहद आवश्यक हो जाता हैं,इससे बच्चा भी एक्टिव और स्वस्थ रहता हैं।
  • पुस्तकें – मां को जब भी खाली समय में  अपनी मन पसंदीदा  पुस्तकें पढ़े । जैसे नोबेल, प्रेग्नेंसी बुक, कहानियां आदि।
  • पूजा-पाठ –  हमें पूजा पाठ प्रतिदिन करना  चाहिए ,चाहे हम किसी भी धर्म में विश्वास रखते हो। 15मिनट का समय निकाल कर हमें उस परमात्मा का धन्यवाद करना चाहिए जिसने आपकी झोली में इतनी बड़ी खुशी दी हैं।
  • सामाजिक संपर्क – गर्भावस्था के दौरान मां को अकेले ना रहकर बल्कि साथ में रहना चाहिए। लोगों से बाते करें, हंसी मजाक करें, कुछ अपनी सुनाए, कुछ लोगों की सुने ताकि आप आनंदमय महसूस कर सके।
  • बच्चे से बातें करना – गर्भवती मां को अपने बच्चे से पेट को सहलाकर  बाते करना चाहिए ताकि ना केवल आप बल्कि बच्चा भी आपसे इमोशनल रूप से जुड़ सके।
  • धार्मिक स्थल – आप जिस धर्म की आस्था रखते हैं उस स्थान(मंदिर ,मस्जिद,गुरुद्वारा,जैन मंदिर आदि) पर घूमने के उद्देश्य से जाए तथा अपने आप को प्रसन्नचित  महसूस करें ,इससे चारो तरफ एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ  चीज़े ऐसी भी हैं जो मां को नहीं करना चाहिए आइए जानते हैं

  • बहुत ज्यादा एक जगह नहीं  बैठे रहना चाहिए, हमेशा चलते फिरते रहे ताकि बच्चा भी आपकी तरह एक्टिव रहे। (यदि आपको डॉक्टर के द्वारा बेडरेस्ट की सलाह दी गई है तो आप उनके परामर्श को नजरअंदाज न करें)
  • इस दौरान बॉडी को झटके से ना झुकाए ,आहिस्ते से अपने आप को संभालकर झुके।
  • सीढ़ी से चढ़ते तथा उतरते समय इस बात का ख्याल रखे की पैरो की गति धीमी हो।
  • अपने आप को अकेला व थका हुआ महसूस ना होने दें इसके लिए आप लोगों के संपर्क में बने रहें तथा कोशिश करें कि आप स्वयं अपने आप को मोटिवेट फील कराएं तथा अपने आप को किसी ना किसी काम में व्यस्त रखें।
  • हार्मोन्स उतार-चढ़ाव के कारण गुस्सा आना चिड़चिड़ा होना मन उदास होना आदि लाजमी है, मां का उदास चिड़चिड़ा होना बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव डालता हैं इसलिए परिवार और मां का कर्तव्य बनता हैं कि घर के माहोल व वातावरण को स्वस्थ बनाए रखे। तथा उसे मेंटली सपोर्ट दे ताकि वह अपने आप में पॉजिटिव फील कर सके।
  • मोबाईल का इस्तेमाल कम करे क्यों की मोबाइल का रेडिएशन मां व बच्चे  दोनों के लिए हानिकारक होता हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को बहुत भीड़ भाड़ जगह, लाउडस्पीकर, प्रदूषित स्थान  धूम्रपान, सिगरेट की गंध से बचना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं की बुरी आदतें जैसे एल्कोहल,तम्बाकू, गुटका, सिगरेट आदि के सेवन का त्याग करे ।इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

जब बच्चा मां के गर्भ में आता हैं तो मां व बच्चे न केवल फिजिकली बल्कि मेंटली तरीके से जुड़ता  हैं इसलिए एक मां का खुश रहना बेहद ज़रूरी है।  इसके लिए परिवार का दायित्व बनता हैं कि वह मां की जरूरतों को समझे तथा घर के माहोल को खुशनुमा बनाए रखे। अगर मां खुश रहेगी तो गर्भ में पलने वाला बच्चा भी खुश रहेगा जिसके प्रभाव से बच्चा स्वस्थ और हेल्थी होगा। मां की हर एक क्रिया जैसे खान पान , लोगों से मिलना, मन में कुछ चलना आदि क्रियाएं  बच्चे पर  सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। 

Frequently Asked Question

स्वस्थ बच्चा होने के लिए मुझे गर्भावस्था के दौरान क्या करना चाहिए?

जब बच्चा मां के गर्भ में आता हैं तो मां व बच्चे न केवल फिजिकली बल्कि मेंटली तरीके से जुड़ता  हैं । इसलिए एक मां का खुश रहना बेहद ज़रूरी है।  इसके लिए परिवार का दायित्व बनता हैं कि वह मां की जरूरतों को समझे तथा घर के माहोल को खुशनुमा बनाए रखे। अगर मां खुश रहेगी तो गर्भ में पलने वाला बच्चा भी खुश रहेगा जिसके प्रभाव से बच्चा स्वस्थ और हेल्थी होगा। मां की हर एक क्रिया जैसे खान पान , लोगों से मिलना, मन में कुछ चलना आदि क्रियाएं  बच्चे पर  सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। 

गर्भावस्था के लिए किन चार चीजों की आवश्यकता होती है?


योगा –दिन की शुरुआत यदि हम योगा से करते हैं तो हम दिन भर तरोताजा महसूस करते हैं। मां का योगा करना, बच्चे के साथ साथ मां के लिए भी  फायदेमंद साबित होता हैं। प्राणायाम में अनुलोम विलोम , भ्रामरी,ओम का उच्चारण, मेडीटेशन कर सकते हैं। तथा आसन  डॉक्टर के परामर्श के अनुसार करे।
म्यूज़िक – इस दौरान हमें स्प्रिचुअल सोंग जैसे भजन, peaceful song सुनने चाहिए ,जो हमारे मन को खुश और आनंद मय प्रदान करे। इसके साथ साथ आप और आपके बच्चे को  भी भावात्मक रूप से जोड़ती हैं।
मॉर्निंग वॉक –  एक मां व बच्चे को स्वस्थ वातावरण व सुबह की हल्की धूप मिल सके इसके लिए मॉर्निंग वॉक करना बेहद आवश्यक हो जाता हैं,इससे बच्चा भी एक्टिव और स्वस्थ रहता हैं।
पुस्तकें – मां को जब भी खाली समय में  अपनी मन पसंदीदा  पुस्तकें पढ़े । जैसे नोबेल, प्रेग्नेंसी बुक, कहानियां आदि।

गर्भावस्था के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए?


1. बहुत ज्यादा एक जगह नहीं  बैठे रहना चाहिए, हमेशा चलते फिरते रहे ताकि बच्चा भी आपकी तरह एक्टिव रहे। (यदि आपको डॉक्टर के द्वारा बेडरेस्ट की सलाह दी गई है तो आप उनके परामर्श को नजरअंदाज न करें)
2. इस दौरान बॉडी को झटके से ना झुकाए ,आहिस्ते से अपने आप को संभालकर झुके।
3. सीढ़ी से चढ़ते तथा उतरते समय इस बात का ख्याल रखे की पैरो की गति धीमी हो।
4. अपने आप को अकेला व थका हुआ महसूस ना होने दें इसके लिए आप लोगों के संपर्क में बने रहें तथा कोशिश करें कि आप स्वयं अपने आप को मोटिवेट फील कराएं तथा अपने आप को किसी ना किसी काम में व्यस्त रखें।

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